गुरुवार, 2 नवंबर 2017

51 शक्तिपीठ महात्म्य

आइए जानते हैं 51 शक्तिपीठों के बारे में?

आदिशक्ति मां के 51 शक्तिपीठों की उपासना अनादिकाल से की जा रही है। धर्मग्रंथों के अनुसार 51 शक्तिपीठों की यात्रा मनोवांछित फल प्रदान करती है। तो आज हमारे साथ आप भी पढ़िये पवित्र 51 शक्तिपीठों का वर्णन और मांग लीजिए आदिशक्ति से अपनी मन की मुराद।

1.विमला-भुवनेश्वरी शक्तिपीठ- यहां सती का किरीट गिरा था..यह पावन स्थल किरीट में स्थित है.. यहां की शक्ति विमला यानि भुवनेश्वरी हैं और यहां भैरव संवर्त रूप में विराजमान हैं।

2.उमा शक्तिपीठ- यहां सती का केशपाश गिरा था..यह स्थल वृंदावन में अवस्थित है.. यहां की शक्ति देवी कात्यायनी हैं और भैरव भूतेश रूप में विराजमान हैं..

3.महिषमर्दिनी शक्तिपीठ- यहां सती का त्रिनेत्र गिरा था..यह पावन स्थली महाराष्ट्र के कोल्हापुर करवीर में अवस्थित है…यहां की शक्ति महालक्ष्मी हैं और यहां भैरव क्रोधीश रूप में विराजमान हैं..

4.श्रीसुंदीरी शक्तिपीठ- यहां माता सती का दक्षिण तल्प यानि कनपटी गिरा था..यह पावन स्थान श्रीपर्वत में है.. यहां की शक्ति श्री सुन्दरी हैं और भैरव सुन्दरानन्द रूप में विराजमान हैं…

5. विशालाक्षी शक्तिपीठ- यहां माता सती के कर्ण-मणि गिरे थे। यह पावन स्थान उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित है …यहां की शक्ति विशालाक्षी और भैरव काल भैरव हैं।

6. विश्वमात्रिका शक्तिपीठ- यहां माता का वामगण्ड यानी बायां कपोल गिरा था। यह पावन स्थली गोदावरी तट पर स्थित है … यहां की शक्ति विश्वेश्वरी हैं और भैरव दण्डपाणि रुप में विराजमान हैं।

7. नारायणी शक्तिपीठ- यहां माता सती के उर्ध्व दन्त गिरे थे..यह पावन स्थान तमिलनाडु के शुचि में स्थित है.. यहां की शक्ति नारायणी हैं और भैरव संहार रूप में विराजमान हैं।

8. वाराही शक्तिपीठ- यहां माता के अधोदन्त गिरे थे..यह पावन स्थली पंचसागर पर स्थित हैं.. यहां की शक्ति वाराही हैं और भैरव महारुद्र रूप में विराजमान हैं।

9. सिद्धिदा, ज्वालामुखी शक्तिपीठ- यहां माता सती का जिह्वा गिरा था…यह पावन स्थल हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा में स्थित है…यहां की शक्ति सिद्धिदा हैं और भैरव उन्मक्त रूप में विराजमान हैं।

10. अवन्ती शक्तिपीठ- यहां माता सती के ऊर्ध्व ओष्ठ गिरे थे…यह पावन स्थान भैरव पर्वत पर स्थित है…यहां की शक्ति अवन्ती हैं और भैरव लम्बकर्ण रूप में विराजमान हैं. इस शक्तिपीठ को लेकर विद्वानों में मतदभेद है। कुछ गुजरात के गिरिनार के निकट भैरव पर्वत को तो कुछ मध्य प्रदेश के उज्जैन के निकट क्षीप्रा नदी तट पर वास्तविक शक्तिपीठ मानते हैं, जहां माता का उफध्र्व ओष्ठ गिरा है। यहां की शक्ति अवन्ती तथा भैरव लंबकर्ण हैं.

11. फुल्लरा शक्तिपीठ- यहां माता सती का अधरोष्ठ यानी नीचे का होंठ गिरा था।यह पावन स्थली अट्टहास शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के लाबपुर में स्थित है। यहां की शक्ति फुल्लरा हैं औऱ भैरव विश्वेश रूप में विराजमान हैं…

12. भ्रामरी शक्तिपीठ- जहां माता का ठुड्डी गिरी थी।यह पावन स्थली जनस्थान में स्थित है.. यहां की शक्ति भ्रामरी हैं और भैरव विकृताक्ष रूप में विराजमान हैं.

13. महामाया शक्तिपीठ- यहां माता का कण्ठ गिरा था। यह पवित्र स्थली कश्मीर में स्थित हैं… यहां की शक्ति महामाया हैं और यहां भैरव त्रिशंध्येश्वर रूप में विराजमान हैं।

14. नन्दिनी शक्तिपीठ- यहां माता सती का कण्ठहार गिरा था..यह पवित्र स्थान नन्दीपुर में स्थित है..यहां की शक्ति नन्दिनी हैं और भैरव नन्दिकेश्वर रूप में विराजमान हैं…

15. महालक्ष्मी शक्तिपीठ- यहां माता का ग्रीवा गिरा था..यह पावन स्थान आंध्रप्रदेश के श्रीशैल में स्थित हैं… यहां की शक्ति महालक्ष्मी है और यहां भैरव ईश्वरानन्द रूप में विराजमान हैं।

16. कालिका शक्तिपीठ- यहां माता की उदरनली गिरी था..यह पावन स्थान पं बंगला के नलहटी में स्थित है.. यहां की शक्ति कालिका हैं औऱ यहां भैरव योगीश रूप में विराजमान हैं।

17. उमा शक्तिपीठ- यहां माता का वाम स्कंध् गिरा था। यह पावन स्थली मिथिला में है… यहां की शक्ति उमा हैं औऱ यहां भैरव महोतर रूप में विराजमान हैं।

18. कुमारी शक्तिपीठ- यहां माता का दक्षिण स्कंध् गिरा था। यह पावन स्थान रतनावली में स्थित हैं…यहां की शक्ति कुमारी हैं और भैरव शिव रूप में विराजमान हैं।

19. चन्द्रभागा शक्तिपीठ (अम्बाजी शक्तिपीठ, प्रभास पीठ)- यहां माता का उदर गिरा था।यह स्थान प्रयाग में स्थित है..यहां की शक्ति अवन्ति और भैरव वक्रतुण्ड रूप में विराजमान हैं. गुजरात गूना गढ़ के गिरनार पर्वत के प्रथत शिखर पर देवी अिम्बका का भव्य विशाल मन्दिर है, यहां की शक्ति चन्द्रभागा तथा भैरव वक्रतुण्ड है। ऐसी भी मान्यता है कि गिरिनार पर्वत के निकट ही सती का उध्र्वोष्ठ गिरा था, जहां की शक्ति अवन्ती तथा भैरव लंबकर्ण है।

20.त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ-( जालंधर शक्तिपीठ)- यहां माता का वामस्तन गिरा था।यह स्थान पंजाब के जालन्धर में स्थित है..यहां की शक्ति त्रिपुरमालिनी हैं और भैरव भीषण रूप में विराजमान हैं।

21. शिवानी शक्तिपीठ-  यहां माता का दाहिना स्तन गिरा था..यह स्थान रामागिरी में स्थित हैं. यहां की शक्ति शिवानी हैं और भैरव चन्द्र रूप में विराजमान हैं.

22. जय दुर्गा शक्तिपीठ(वैद्यनाथ का हार्द शक्तिपीठ)- यहां माता का ह्रदय गिरा था…यह स्थान झारखंड के देवघर में स्थित है…यहां की शक्ति जयदुर्गा हैं औऱ भैरव वैद्यनाथ रूप में विराजमान है।

23. महिषमर्दिनी शक्तिपीठ- यहां माता का मन गिरा था।यह पवित्र स्थल वकत्रेश्वर में स्थित है…यहां की शक्ति महिषासुरमर्दिनी हैं औऱ भैरव वकत्रनाथ रूप में विराजमान हैं.

24. शर्वाणी शक्तिपीठ- यहां माता का पीठ गिरा था..यह पवित्र स्थल तमिलनाडु के कण्यकाश्रम में स्थित हैं….यहां की शक्ति नारायणी हैं भैरव निमिष रूप में विराजमान हैं।

25. बहुला शक्तिपीठ- यहां माता का वाम बाहु गिरा था। यह पावन स्थली पश्चिम बंगाल के बहुला में स्थित है…यहां की शक्ति बहुला हैं औऱ भैरव भीरुक रूप में विराजमान हैं।

26.मंगलचण्डिका- यहां माता का कुहनी गिरा था।यह पावन स्थान मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है यहां की शक्ति मंगलचण्डिका हैं औऱ भैरव मांगल्य कपिलांबर रूप में विराजमान हैं।

27.गायत्री शक्तिपीठ- यहां माता की कलाइयां गिरी थीं…यह पावन स्थान राजस्थान,पूष्कर के मणिदेविका में स्थित है…यहां की शक्ति गायत्री हैं और भैरव सर्वानन्द रूप में विराजमान हैं।

28. ललिता शक्तिपीठ ( प्रयाग)– यहां माता की हाथ की अंगुलियां गिरी थी। यह पावन स्थान उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में स्थित है। यहां की शक्ति ललिता हैं और भैरव भव रूप में विराजमान हैं।

29. विमला शक्तिपीठ– यहां माता की नाभि गिरी थी. यह पावन स्थान विराजक्षेत्र में स्थित है… यहां की शक्ति विमला हैं औऱ भैरव जगन्नाथ रूप में विराजमान हैं।
उत्कल शक्तिपीठ उड़ीसा के पुरी और याजपुर में माना जाता है जहां माता की नाभि गिरा था। यहां की शक्ति विमला तथा भैरव जगन्नाथ पुरुषोत्तम हैं।

30. देवगर्भा शक्तिपीठ (कांची-) यहां माता का कंकाल गिरा था। यह पावन स्थान तमिलनाडु के कांचीवरम् में स्थित है… यहां की शक्ति देवगर्भा तथा भैरव रुद्र रूप में विराजमान हैं।

31.काली शक्तिपीठ- यहां माता का वाम नितम्ब गिरा था।यह पावन स्थान कालमाधव में स्थित हैं… यहां की शक्ति काली हैं और भैरव आसितांग हैं।

32.नर्मदा शक्तिपीठ- यहां माता का दक्षिण नितम्ब गिरा था।यह पावन स्थान मध्यप्रदेश के शोण में स्थित है… यहां की शक्ति नर्मदा हैं औऱ भैरव भव्यसेन रूप में विराजमान हैं. मध्य प्रदेश के अमरकंटक के नर्मदा मन्दिर शोण शक्तिपीठ है। एक दूसरी मान्यता यह है कि बिहार के सासाराम का ताराचण्डी मन्दिर ही शोण तटस्था शक्तिपीठ है। यहां सती का दायां नेत्रा गिरा था ऐसा माना जाता है। यहां की शक्ति नर्मदा या शोणाक्षी तथा भैरव भद्रसेन हैं।

33. कामाख्या शक्तिपीठ- यहां माता का योनि गिरा था। यह स्थान असम गुवाहाटी के कामगिरि पर्वत पर स्थित है…यहां की शक्ति कामाख्या हैं और भैरव उमानन्द रूप में विराजमान हैं।

34.जयन्ती शक्तिपीठ- यहां माता का वाम जंघा गिरा था।यह पावन स्थान मेघालय के जयन्ती पहाडी पर स्थित है..यहां की शक्ति जयन्ती और भैरव कमदीश्वर रूप में विराजमान हैं।

35. सर्वानन्दकरी शक्तिपीठ- यहां माता का दाहिना जंघा गिरा था।यह पावन स्थान बिहार के मगध में स्थित हैं… यहां की शक्ति सर्वानन्दकरी और भैरव योनकेश रूप में विराजमान हैं. बिहार की राजधनी पटना में स्थित पटनेश्वरी देवी को ही शक्तिपीठ माना जाता है.

36. भ्रामरी शक्तिपीठ- यहां माता का वामपाद गिरा था। यह पावन स्थान पश्चिम बंगाल के तीस्ता नदी पर स्थित है… यहां की शक्ति भ्रामरी और भैरव ईश्वर रूप में विराजमान हैं।

37. त्रिपुरसुन्दरी शक्तिपीठ- यहां माता का दक्षिण पाद गिरा था।यह पावन स्थान त्रिपुरा में स्थित है …यहां की शक्ति त्रिपुरसुन्दरी हैं औऱ भैरव त्रिपुरेश रूप में विराजमान हैं।

38. कापालिनी शक्तिपीठ- यहां माता का बायां टखना गिरा था।यह पावन स्थान पश्चिम बंगाल के विभाष क्षेत्र में स्थित है.. यहां की शक्ति कापालिनी, और भैरव सर्वानन्द रूप में विराजमान हैं।

39. सावित्री शक्तिपीठ- यहां माता के दहिने चरण गिरे थे…यह पावन स्थान हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित है … यहां की शक्ति सावित्री और भैरव स्थाणु रूप में विरामान हैं।

40. भूतधात्री शक्तिपीठ- यहां सती के दाहिने चरण का अंगूठा गिरा था।यह पावन स्थान पश्चिम बंगाल क्षीरग्राम स्थित युगाद्या में स्थित है…यहां की शक्ति भूतधात्री और भैरव श्रीकंटक रूप में विराजमान हैं….

41. अम्बिका शक्तिपीठ- यहां माता सती के दक्षिण पादांगुलियां गिरी थीं। यह पावन स्थान राजस्थान के वैराटग्राम में स्थित है… यहां की शक्ति अंबिका और भैरव अमृत रूप में विराजमान हैं।

42. कालीका शक्तिपीठ- यहां माता के दाएं पांव की अंगूठा के अलावे 4 अन्य अंगुलियां गिरी थीं। यह पावन स्थान कोलकाता के कालीघाट में स्थित है(कालीमन्दिर)…यहां की शक्ति कालिका और भैरव नकुलीश रूप में विराजमान हैं।

43. दाक्षायणी शक्तिपीठ- यहां माता की दाहिनी हथेली गिरी थी… यह पावन स्थान तिब्बत के मानसरोवर तट पर स्थित है …(मानस शक्तिपीठ)… यहां की शक्ति की दाक्षायणी और भैरव अमर रूप में विराजमान हैं।

44. इन्द्राक्षी शक्तिपीठ- यहां माता का नूपुर गिरा था। यह पावन स्थान श्रीलंका में स्थित है(लंका शक्तिपीठ) यहां की शक्ति इन्द्राक्षी और भैरव राक्षसेश्वर रूप में विराजमान हैं।

45.गण्डकी शक्तिपीठ- यहां सती के दक्षिणगण्ड (कपोल) गिरा था।यह स्थान नेपाल में गण्डकी नदी के उद्गम पर स्थित है…(गण्डकी शक्तिपीठ).. यहां की शक्ति गण्डकी और भैरव चक्रपाणि रूप में विराजमान हैं।

46.महामाया शक्तिपीठ- यहां माता सती के दोनों घुटने गिरे थे।यह पानव स्थली नेपाल के काठमाण्डू में पशुपतिनाथ मन्दिर के पास ही स्थित है… (गुह्येश्वरी शक्तिपीठ)…, यहां की शक्ति `महामाया´ और भैरव `कपाल´रूप में विराजमान हैं।

47. कोटट्री शक्तिपीठ, कोटट्री – यहां माता का ब्रह्मरन्ध्र गिरा था।यह स्थान पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रान्त में स्थित है ..यहां की शक्ति माता हिंगलाज और भैरव भीमलोचन रूप में विराजमान हैं..

48.सुनन्दा शक्तिपीठ- यहां माता का नासिका गिरा था।यह पावन स्थली बांग्लादेश के खुलना में सुगंध नदी के तट पर स्थित है… यहां की शक्ति देवी सुनन्दा हैं औऱ भैरव त्रयम्बक रूप में विराजमान हैं। (उग्रतारा देवी का शक्तिपीठ)

49. अपर्णा शक्तिपीठ- यहां माता का वाम तल्प गिरा था।यह पावन स्थान बंग्लादेश के करतोया नदी के तट पर स्थित है( करतोयाघाट शक्तिपीठ) यहां की शक्ति देवी अपर्णा हैं औऱ भैरव वामन रूप में वास करते हैं।

50. भवानी शक्तिपीठ- यहां माता की दाहिनी भुजा गिरी थी.. यह पावन स्थान बंग्लादेश के चटगांव में स्थित है ..(चट्टल का भवानी शक्तिपीठ) । यहां की शक्ति भवानी और भैरव चन्द्रशेखर रूप में विराजमान हैं।

51. यशोरेश्वरी शक्तिपीठ- यहां माता की बायीं हथेली गिरी थी..यह पावन स्थान बांग्लादेश के यशोर में स्थित है..(यशोरेश्वरी शक्तिपीठ) .. यहां की शक्ति यशोरेश्वरी और भैरव चन्द्र रूप में विराजमान हैं।

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