गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

माँ कात्यायनी की महिमा

।।जय माँ कात्यायनी।।
इस बात को तो सभी जानते हैं कि भगवान राम ने आश्विन शुक्ल दशमी तिथि को लंकापति रावण को मार था। लेकिन रावण को मारना भगवान राम के संभव नही था । रावण को मारने से पहले भगवान राम ने ऐसी चाल चली कि, जो देवी रावण की रक्षा कर रही थी वही रावण की मौत का कारण बन गयी।

शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि मां दुर्गा का छठा स्वरूप है देवी कात्यायनी का। देवी ने ऋषि कात्यायन को उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर पुत्री रूप में प्राप्त होने का वरदान दिया था। इसी वरदान के फलस्वरूप देवी कात्यायनी का जन्म हुआ। पुत्री रूप में देवी ने तीन दिनों तक ऋषि कात्यायन की पूजा स्वीकार की इसके बाद देवी अष्टभुजा रूप में प्रकट हुईं और इन्होंने महिषासुर का वध किया।

पुराणों में उल्लेख मिलता है कि जब भगवान विष्णु श्री कृष्ण रूप में प्रकट हुए तब ब्रज की कन्याओं ने कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए देवी कात्यायनी की पूजा की। इसलिए यह देवी ब्रज मण्डल की अधिष्ठात्री देवी कहलाती हैं। नवरात्र के छठे दिन इसी देवी की पूजा होती है। आज चैत्र नवरात्र का छठा दिन है। आज देवी के इसी स्वरूप की पूजा हो रही है।

देवी पुराण में उल्लेख मिलता है कि रावण भगवान शिव के साथ ही आदि शक्ति देवी कात्यायनी का भक्त था। रावण की भक्ति के कारण देवी अपनी योगनियों के साथ लंका में वास करती थीं जिससे रावण अजेय हो गया था।

देवी कात्यायनी की सुरक्षा प्राप्त होने के कारण रावण देवाताओं को कष्ट पहुंचाने लगा। देवताओं ने भगवान विष्णु से रावण से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। भगवान विष्णु सोच में पड़ गये कि देवी कात्यायनी से सुरक्षा प्राप्त होने के कारण रावण को मारना उनके लिए कठिन है। इस समस्या का हल निकालने के लिए भगवान विष्णु देवी कात्यायनी के पास गये।

भगवान विष्णु ने कात्यायनी से कहा कि आपसे सुरक्षा प्राप्त होने के कारण रावण निर्भय होकर अत्याचार कर रहा है। इसका अंत करना आवश्यक है इसलिए आप अपनी सुरक्षा हटा लीजिए। भगवान विष्णु की प्रार्थना से प्रसन्न होकर देवी ने कहा कि आप रामावतार लीजिए, इस अवतार में देवी लक्ष्मी सीता रूप में आपकी सहायता करेंगी।

देवी लक्ष्मी मेरा ही स्वरूप हैं। जब रावण सीता का हरण करेगा तो वह मेरा अपमान होगा जिससे मैं अपनी सुरक्षा हटा लूंगी और आप रावण का वध करने में सफल होंगे।

भगवान राम ने रावण से युद्घ करने के पहले देवी कात्यायनी की आराधना की और देवी से रावण को दी गयी सुरक्षा हटाने की प्रार्थना की। भगवान विष्णु को दिये गये वचन के अनुसार देवी लंका त्याग कर अपने लोक में चली गयी और भगवान राम रावण का वध करने में सफल हुए। मान्यता यह भी है कि भगवान राम ने जिस वाण से रावण का वध किया था वह वाण राम को देवी कात्यायनी द्वारा प्रदान किया गया था ।।

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